Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

देवदासी-प्रथा, जो आज भी अतीत नहीं है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 26, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देवदासी-प्रथा, जो आज भी अतीत नहीं है

इतिहास गवाह है कि हर काल मे किसी ना किसी प्रकार से स्त्रियों का यौन शोषण होता रहा है- इसी में से एक प्रथा थी देवदासी प्रथा.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

देवदासी प्रथा एक ऐसी प्रथा थी, जिसमे धर्म का डर दिखा कर भोली भाली समाज की निचली जनता को बेवकूफ़ बनाया जाता था. इसकी आड़ में खुलेआम केवल दलित वर्ग की स्त्रियों का शोषण किया जाता था. जो सुंदर होती थी उन्हें किसी तरह से प्रभु की सेवा के नाम पर ज़िंदगी भर के लिए व्यभिचार के दलदल में धकेल दिया जाता था. तब कुछ कर्मकांड के नाम पर उन सब कुंवारी कन्याओं का शुद्धिकरण कर के उच्च वर्ग के पुरुषों, राजाओं, पुजारियों की सेज सेवा के तैयार किया जाता था. उनसे उत्पन्न होने वाली संतान को समाज मे कोई अधिकार प्राप्त नही होते थे.




कुछ मान-सम्मान व गहने कपड़े की लालच में इस प्रकार की प्रथाओं के नाम पर ना जाने कितने सालो तक स्त्रियों का शोषण होता रहा है, जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति जीवन जीने की मजबूरी बनती चली गई. इन्हें अक्सर मंदिर के पीछे तरफ रखा जाता. मंदिर की मूर्ति से ही इनका विवाह कर के इन्हें सदा सुहागन होने का पद दिया जाता था. ये देवदासियां जो भगवान की पत्नी कहलाती थी, इन्हें मूर्ति को छूने व गर्भगृह में प्रेवश करने की सख्त मनाही थी ???

इन भगवान की पत्नियों का दैहिक उपभोग, धर्म के नाम पर खुलेआम होता था. इन देवदासियों को साफ सफाई व अन्य काम दिए जाते थे. ये प्रथा दक्षिण भारत मे सर्वाधिक देखने को मिलती थी. धर्म के नाम जब इसकी पाशविकता अत्यधिक बढ़ने लगी तो, दक्षिण भारत मे इस प्रथा पर करीबन 1984 में पूरी तरह से रोक लगा दी गई, फिर भी वर्तमान में कहीं कहीं ये प्रथा लुकेछिपे तौर पर देखने को मिल सकती है.




ये ‘देवदासी’ एक हिन्दू धर्म की प्राचीन प्रथा है. भारत के कुछ क्षेत्रों में खास कर दक्षिण भारत में महिलाओं को धर्म और आस्था के नाम पर वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला गया. सामाजिक-पारिवारिक दबाव के चलते ये महिलाएं इस धार्मिक कुरीति का हिस्सा बनने को मजबूर हुर्इं. देवदासी प्रथा के अंतर्गत कोई भी महिला मंदिर में खुद को समर्पित करके देवता की सेवा करती थीं. देवता को खुश करने के लिए मंदिरों में नाचती थीं. इस प्रथा में शामिल महिलाओं के साथ मंदिर के पुजारियों ने यह कहकर शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए कि इससे उनके और भगवान के बीच संपर्क स्थापित होता है.




धीरे-धीरे यह उनका अधिकार बन गया, जिसको सामाजिक स्वीकायर्ता भी मिल गई. उसके बाद राजाओं ने अपने महलों में देवदासियां रखने का चलन शुरू किया. मुगलकाल में, जबकि राजाओं ने महसूस किया कि इतनी संख्या में देवदासियों का पालन-पोषण करना उनके वश में नहीं है, तो देवदासियां सार्वजनिक संपत्ति बन गर्इं.

कर्नाटक के 10 और आंध्र प्रदेश के 14 जिलों में यह प्रथा अब भी बदस्तूर जारी है. देवदासी प्रथा को लेकर कई गैर-सरकारी संगठन अपना विरोध दर्ज कराते रहे. सामान्य सामाजिक अवधारणा में देवदासी ऐसी स्त्रियों को कहते हैं, जिनका विवाह मंदिर या अन्य किसी धार्मिक प्रतिष्ठान से कर दिया जाता है. उनका काम मंदिरों की देखभाल तथा नृत्य तथा संगीत सीखना होता है.

  • गीतांजली




Read Also –

‘स्तन क्लॉथ’ : अमानवीय लज्जाजनक प्रथा के खिलाफ आंदोलन
महान टीपू सुल्तान और निष्कृट पेशवा
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Tags: देवदासी
Previous Post

अयोध्या का फ्लॉप शो, बासी कढ़ी में उबाल नही आता

Next Post

हिंदी दिवस की तरह ही संविधान दिवस भी मुबारक

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिंदी दिवस की तरह ही संविधान दिवस भी मुबारक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

फासीवाद का भविष्य : कार्लो गिन्ज़बर्ग से जोसेफ कन्फावरेक्स का साक्षात्कार

August 3, 2023

हत्यारा विरोध से नहीं सिर्फ अपनी मौत से कांपता है

June 15, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.