Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

RSS ने इस देश का क्या हाल कर दिया है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 31, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

RSS ने इस देश का क्या हाल कर दिया है

श्याम मीरा सिंह : इन सभी तस्वीरों को देख लीजिए. RSS ने इस देश का क्या हाल कर दिया है. RSS के हिन्दू तालिबान की पहली खेप आनी शुरू हो गई. इसका नाम गोपाल है, गोपाल रामभक्त. पिछले एक हफ्ते से ही ये जॉम्बी प्लान बनाए हुआ था. अपनी फेसबुक वॉल पर बाकायदा घोषणा भी की है कि जल्दी ही शाहीनबाग का खेल खत्म कर देगा और यदि ऐसा करते समय वह खुद मर भी गया तो उसे भगवा में लपेटकर ले जाया जाए, वह भी जय श्री राम के नारों के साथ.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ये जॉम्बी बंदूक चलाते समय नारे लगा रहा था- ‘टुकड़े टुकड़े गैंग, आजादी ले लो, जय श्री राम, भारत माता की जय, वंदेमातरम.’

सब जानते हैं हिंसा और कत्लेआम के नारों के साथ भारत माता और वंदेमातरम के नारों का घालमेल किस संगठन के द्वारा किया जा रहा है. ये आदमी अकेला नहीं है. ऐसे अनगिनत जॉम्बी आपके, हमारे, हम सब के आसपास घूम रहे हैं, जो किसी भी वक्त आप पर हमला कर सकते हैं. ये गांव-गांव, शहर-शहर की हालत है.

क्या आपने सोचा कि शाहीनबाग आंदोलन पिछले 40 दिनों से चल रहा है, लेकिन इसने गांधी की शहादत वाले दिन को ही क्यों चुना ? ये जॉम्बी पिछले चार दिन पहले ही घोषणा कर चुका था कि 31 जनवरी के दिन तक इसकी पोस्टों पर नजर बनाए रखी जाए. चूंकि ये जानता था RSS की लड़ाई इसी गांधी से ही है. आरएसएस के तालिबानी हिंदुत्व के बीच में गांधी की सनातन परंपरा ही आड़े आ रही है इसलिए आरएसएस ने जिन्ना से अधिक गांधी के चरित्र का मालाइन किया है.

आपने ध्यान दिया इस जॉम्बी ने तिरंगे में लिपटने के लिए नहीं कहा, बल्कि भगवा में लिपटने की बात कही है. यही आरएसएस का आईडिया है. आरएसएस तिरंगे को, राष्ट्रगान को अपना मानता ही नहीं है. गांधी को भी नहीं मानता है. लेकिन इनके नेता मंच से इसका ढोंग जरूर करेंगे, क्योंकि देश की अंतर्चेतना अभी भी उतनी खत्म नहीं हुई है. लेकिन समय आते ही, गांधी की जगह गोडसे राष्ट्रपिता बन जाएगा, राष्ट्रगान की जगह ‘आरएसएस की प्रार्थना’ जगह ले लेगी. तिरंगा की जगह ‘भगवा’.

आरएसएस ने इस देश को कहांं पहुंचा दिया है, आपको अनुमान भी नहीं. उसकी पिछले 100 सालों की मेहनत अब सामने आ रही है. ये लड़का, भगत सिंह को पूजता है जो खुद आरएसएस की विचारधारा के सबसे अधिक खिलाफ विचार रखते थे. भगत सिंह + जयश्री राम + भारत माता + बंदूक और हत्याओं का खतरनाक गठजोड़ आरएसएस की मेहनत का परिणाम है.

मीडिया, आरएसएस और सरकार, इन तीनों ने मिलकर इस देश को हिन्दू-तालिबान में तब्दील कर दिया है लेकिन पता नहीं आप किस खास घोषणा का इंतजार कर रहे हैं.

गिरीश मालवीय : गोड़से सफल सिद्ध हो रहा है हमने जॉम्बी पैदा कर लिए हैं, जो सड़को पर लाशें बिछा देना चाहते है. यह व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ही छात्र है, जो खुलेआम दिल्ली की सड़कों पर पिस्टल लहरा रहा है. गोलियां चला रहा हैं. हमलावर अपना नाम पुलिस से गोपाल बता रहा है. साथ ही खुद को रामभक्त भी बता रहा है. प्रत्यक्षदर्शी बता रहे हैं कि युवक गोली चलाने के दौरान और ले लो आजादी, भारत मां की जय, दिल्ली पुलिस जिंदाबाद और वंंदे मातरम का नारा लगा रहा था. अब यह तो तय है कि यह व्यक्ति आतंकवाद की मानक और स्वीकृत परिभाषा से बाहर है.

आज CAA और NRC के विरोध में दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से राजघाट तक की ओर जो मार्च निकाला जा रहा था उस मार्च के दौरान इस शख्स ने फायरिंग की है. घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि आदमी ने खुलेआम हथियार लगाया लेकिन सैकड़ों की संख्या में आर्म्ड पुलिस मौजूद थी लेकिन इस शख्स को गोली चलाने से रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया.

जूलियस सीजर के हत्यारों में से एक का नाम सिन्ना था. भीड़ जब सीजर के हत्यारों को तलाश रही थी तो उसे सिन्ना नाम का एक व्यक्ति मिला जो ‘हत्यारा सिन्ना’ नहीं बल्कि दूसरा व्यक्ति ‘कवि सिन्ना’ था. भीड़ जब उसे मारने लगी तो उसने कहा कि मैं तो वो नही हूं जिसे आप ढूंढ़ रहे हैं तो भीड़ ने कहा कि ‘उससे मतलब नहीं, सिर्फ नाम ही काफी है.’

जब हमारे प्रधानमंत्री सार्वजनिक सभा में हजारों लोगों की भीड़ के सामने कहते है कि ‘आप कपड़े देखकर भी दंगाइयों को पहचान सकते हैं’, जब संविधान की शपथ लेने वाले केंद्रीय मंत्री नारा देते हैं कि ‘गोली मारो सालो को’ तो दरअसल वो कह रहे होते है ‘नाम ही काफी है.’ ऐसे में किसी ‘रामभक्त गोपाल’ जरूर सामने आना ही है, इसमे आश्चर्य की क्या बात है ?

यह गोपाल ओर कोई नही है यह हेट स्पीच की पैदाइश है. लगातार सालों तक गोपाल जैसे लोगों के दिमाग में जहर इंजेक्ट किया गया है. आपको याद होगा कि पिछले चुनाव में हर बार मोदी अपने भाषणों में फर्स्ट टाइम वोटर्स का जिक्र करते थे. फर्स्ट टाइम वोटर 18 से 22 वर्ष का वोटर है, जो पहली बार वोट देने जा रहा है. यह वोटर सोशल मीडिया के आने के पहले अपने परिवार की परंपरा के आधार पर वोट डाला करता था लेकिन अब वह अपने मन मर्ज़ी से वोट डालता है. उसे व्हाट्सएप और फेसबुक जैसी सोशल साइट्स के माध्यम से लगातार समाज मे घृणा फैलाने वाला मटेरियल पुहंचाया गया है.

कभी आप लोकल बसों में ट्रेनों में सफर करते, सड़को किनारे खड़े युवाओं की मोबाइल स्क्रीन में झांक कर देखिए उन्हें क्या दिखाया जा रहा है ? हर तरह का मटेरियल चाहे वह आईटी सेल के मीम हो चाहे फेक न्यूज़ हो चाहे नफरत फैलाने वाले भाषण हो या कोई अन्य तरह के वीडियो हो या कोई भी टेक्स्ट मेसेज हो, उनमें बस एक ही बात रहती है दूसरे सम्प्रदाय प्रति घृणा का भाव. इस घृणा के भाव को देश का मीडिया निरंतर खाद पानी देता रहता है. न्यूज़ चैनलों की बहस में एंकर्स का आप रुख देखिए, वह किस तरह का हिडन एजेंडा पोषित करते है. इसके साथ जो बीजेपी का आईटी सेल जिस तरह से प्रोफेशनल सांटिफिक एप्रोच के साथ नए युवाओं को खास तरह का मटेरियल पुहंचाता है, वह एक तरह का डेडली कॉम्बिनेशन है.

हमारे गृहमंत्री और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जी सार्वजनिक रूप से यह कई बार बता चुके हैं कि उनका सोशल मीडिया संगठन इतना मजबूत है कि वो जैसा चाहें, वैसा संदेश जनता तक पहुंचा सकते हैं. दरअसल बीजेपी की सोशल मीडिया समूह हर तरह के हेट मटेरियल को गढ़ता है, डिजाइन करता है, क्रियान्वित करता है और उसे अपने डाटा एनेलिटिक्स के हिसाब से सही जगह पहुंचाता हैं. इस रामभक्त गोपाल को आप सिर्फ शुरुआत ही समझे. अभी तो बहुत से बाल-गोपाल और तैयार हो गए हैं और सामने आने वाले हैं.

Read Also –

जानिए, आपका टीवी एंकर आपके खिलाफ लड़ रहा है
शरजील इमाम : दिल्ली चुनाव की बैतरणी पार करने का मोदी-शाह का हथकण्डा
दिल्ली विधानसभा चुनाव में गूंजता हिंसा का पाठ
CAA-NRC के विरोध के बीच जारी RSS निर्मित भारत का नया ‘संविधान’ का प्रारूप
शाहीन बाग – हक और इंसाफ का नाम

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गांधी जी का देसी अर्थशास्त्र

Next Post

महात्मा गांधी की शहादत और RSS की गोली

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

महात्मा गांधी की शहादत और RSS की गोली

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हत्यारों की ‘टी’-पार्टी

November 9, 2019

अगर हिमालय न होता …

June 6, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.