Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जेएनयू के खिलाफ षड्यंत्ररत् क्यों है आरएसएस ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 30, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

[ जेएनयू देश का अकेला विश्वविद्यालयहै जिसके डस्टबिन तक की जांच कर भाजपा नेता ने कंडोम की गिनती की है और देश भर में बदनाम करने का दुश्प्रचार चलाया है. इतने बड़े और भयानक दुश्प्रचार के बाद भी अगर जेएनयू देश की शैक्षणिक जगत में चट्टान की तरह खड़ा है तो वह जेएनयू की लोकतंत्र के प्रति गहरा विश्वास और समूचे देश की तमाम लोकतांत्रिक ताकतों का एकजुट हो जाना रहा है. जेएनयू देश में लोकतंत्र, लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनाव, बेहतरीन लोकतांत्रिक आकादमिक शैली, अपने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार सहित  अनेक जनवादी मूल्यों के लिए जाना जाता है, जिससे वास्तव में आरएसएस  नफरत करता है और जल्द से जल्द खत्म कर देने पर आमादा है. प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी के द्वारा विश्लेषित यह आलेख पाठकों के लिए पेश है ]

जेएनयू के खिलाफ षड्यंत्ररत् क्यों है आरएसएस ?

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

जेएनयू पर एकबार फिर से बमबटुकों के हमले शुरू हो गए हैं. फ़रवरी 2016 के बाद यह हमलों का दूसरा चरण है. जेएनयू के VC ने आरएसएस के नेतृत्व के आदेश के बाद ही टैंक लगाने का प्रस्ताव रखा था. VC के बयान के बाद आरएसएस के साइबर टट्टू सोशल मीडिया में अहर्निश दौड़ रहे हैं और जेएनयू को फिर से गरियाने में लगे हैं.

हम कहना चाहते हैं जेएनयू सच में महान है, वरना बार -बार आरएसएस हमले न करता. जेएनयू महान, वाम की वजह से नहीं, बल्कि विवेकवादी उदार अकादमिक परंपरा के कारण महान है. आरएसएस अपनी नई टैंक मुहिम के बहाने, जेएनयू के बारे में यह धारणा फैलाने की कोशिश कर रहा है कि जेएनयू को ‘मानवता विरोधी और राष्ट्रविरोधी’ संस्थान के रूप में कलंकित किया जाय.

पहले हम यह जान लें कि जेएनयू को ये लोग नापसंद क्यों करते हैं ?

देश में और भी विश्वविद्यालय हैं, उनको बदनाम करने की कोई मुहिम नहीं चल रही, क्योंकि वे सब आरएसएस और टैंक कल्चर के क़ब्ज़े में हैं !

आरएसएस की जेएनयू के प्रति घृणा का प्रधान कारण है जेएनयू के अंदर उच्च अकादमिक माहौल, लोकतान्त्रिक संस्कृति और शिक्षक-छात्र संबंध. जेएनयू में देश के अन्य विश्वविद्यालयों के जैसे शिक्षक -छात्र संबंध नहीं हैं. यहां अधिकांश शिक्षक अपने छात्रों को मित्रवत मानकर बातें करते हैं. ज़्यादातर शिक्षकों के अकादमिक आचरण में पितृसत्तात्मकता का नजरिया नहीं है. यहाँ, वे शिक्षक होते हैं गुरू नहीं. यह वह प्रस्थान बिंदु है जहांं से जेएनयू अन्य विश्वविद्यालयों से अलग है.

दूसरी बडी चीज है सवाल खड़े करने की कला. यह कला यहां के समूचे माहौल में है. यहां छात्र सवाल करते हैं साथ ही “खोज” के नजरिए को जीवन का लक्ष्य बनाते हैं. कक्षा से लेकर राजनीतिक मंचों तक कैंपस में सवाल करने की कला का साम्राज्य है. यह दूसरा बडा कारण है जिसके कारण जेएनयू को आरएसएस नापसंद करता है. आरएसएस को ऐसे कैंपस चाहिए, जहांं छात्रों में सवाल करने की आदत न हो, खोज करने की मानसिकता न हो.

उल्लेखनीय है जिन कैंपस में सवाल उठ रहे हैं वहीं पर आरएसएस के बमबटुकों के साथ, लोकतांत्रिक छात्रों और शिक्षकों का संघर्ष हो रहे हैंं. आरएसएस ऐसे छात्र -शिक्षक पसंद करता है जो हमेशा “जी-जी” करता चले और सवाल न करें !

आरएसएस वाले अच्छी तरह जानते हैं कि जेएनयू के छात्र वामपंथी नहीं हैं. वे यह भी जानते हैं जेएनयू के अंदर आरएसएस की शिक्षकों में एक ताकतवर लॉबी है. इसके बावजूद वे जेएनयू के बुनियादी लोकतांत्रिक चरित्र को बदल नहीं पा रहे हैं. यही वजह है वे बार -बार छात्रों और शिक्षकों पर हमले कर रहे हैं. इन हमलों के लिए नियोजित ढंग से मीडिया का दुरूपयोग कर रहे हैं. राष्ट्रवाद और हिंदुत्व तो बहाना है.

असल लक्ष्य तो जेएनयू के लोकतांत्रिक ढांंचे और लोकतांत्रिक माहौल को नष्ट करना है. संघ को लोकतांत्रिक माहौल से नफरत है. उसे कैंपस में अनुशासित माहौल चाहिए जिससे कैंपस को भोंपुओं और भोंदुओं का केन्द्र बनाया जा सके.

जेएनयू छात्रसंघ का संविधान, तीसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है जिसे आरएसएस नष्ट करना चाहता है. जेएनयू देश का अकेला विश्वविद्यालय है, जहांं छात्रसंघ पूरी तरह स्वायत्त हैं. छात्रसंघ के चुनाव स्वयं छात्र संचालित करते हैं. छात्रसंघ के चुनाव में पैसे की ताकत की बजाय विचारों की ताकत का इस्तेमाल किया जाता है. छात्रों को अपने पदाधिकारियों को वापस बुलाने का भी अधिकार है. छात्रसंघ किसी नेता की मनमानी के आधार पर काम नहीं करता, बल्कि सामूहिक फैसले लेकर काम करता है.

छात्रसंघ की नियमित बैठकें होती हैं और उन बैठकों के फैसले, पर्चे के माध्यम से छात्रों को सम्प्रेषित किए जाते हैं. छात्रसंघ के सभी फैसले सभी छात्र मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं.

विवादास्पद मसलों पर छात्रों की आमसभा में बहुमत के आधार पर बहस के बाद फैसले लिए जाते हैं. ये सारी चीजें छात्रों ने बडे संघर्षों के बाद हासिल की हैं. इनके निर्माण में वाम छात्र संगठनों की अग्रणी भूमिका रही है.

जाहिरा तौर पर आरएसएस और बमबटुकों को इस तरह के जागृत छात्रसंघ से परेशानी है और यही वजह है बार बार छात्रसंघ पर हमले हो रहे हैं.

इसके विपरीत आरएसएस संचालित छात्रसंघों को देखें और उनकी गतिविधियों को देखें तो अंतर साफ समझ में आ जाएगा.

जेएनयू में टैंक कल्चर के प्रतिवाद की परंपरा रही है. टैंक कल्चर वस्तुत: युद्ध की संस्कृति को अभिव्यंजित करती है. जेएनयू के छात्रों का युद्ध के प्रतिवाद का शानदार इतिहास रहा है. इस्रायल के हमलावर रूख के खिलाफ प्रतिवाद से लेकर वियतनाम युद्ध के प्रतिवाद तक, अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ प्रतिवाद से लेकर तियेनमैन स्क्वेयर पर चीनी टैंक दमन के प्रतिवाद तक छात्रों के सामूहिक प्रतिवाद की जेएनयू छात्रसंघ की परंपरा रही है. जेएनयू के छात्रों को मानवतावादी नजरिए से सोचने-समझने और काम करने की प्रेरणा, वहांं के पाठ्यक्रम और परिवेश से मिलती है, जिसे आरएसएस पसंद नहीं करता.

Read Also –

हिन्दुत्व की आड़ में देश में फैलता आतंकवाद
शिक्षा को तबाह करती सरकार
भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर स्टीव की तल्ख टिप्पणी
हरिशंकर परसाई की निगाह में भाजपा

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

[ प्रतिभा एक डायरी वेब ब्लॉग साईट है, जो अन्तराष्ट्रीय और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर घट रही विभिन्न राजनैतिक घटनाओं पर अपना स्टैंड लेती है. प्रतिभा एक डायरी यह मानती है कि किसी भी घटित राजनैतिक घटनाओं का स्वरूप अन्तराष्ट्रीय होती है, और उसे समझने के लिए अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देखना जरूरी है. प्रतिभा एक डायरी किसी भी रूप में निष्पक्ष साईट नहीं है. हम हमेशा ही देश की बहुतायत दुःखी, उत्पीड़ित, दलित, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के पक्ष में आवाज बुलंद करते हैं और उनकी पक्षधारिता की खुली घोषणा करते हैं. ]

Tags: आरएसएसछात्रजेएनयू
Previous Post

हर सम्भव तरीक़े से पूर्ण स्वतन्त्रता – भगत सिंह

Next Post

आधारः ट्राई अध्यक्ष की निकली हेकड़ी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

आधारः ट्राई अध्यक्ष की निकली हेकड़ी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ऑनलाइन जुआ देश के भविष्य को बर्बाद कर देगा

July 30, 2021

भीड़ हमेशा साहस से बहुत डरती है

February 27, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.