Wednesday, July 29, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

समानता, स्वतंत्रता ,बंधुता और भारतीय संविधान

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 16, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

समानता, स्वतंत्रता ,बंधुता और भारतीय संविधान

आज जातिवादी और साम्प्रदायिक शक्तियां पांच हज़ार वर्ष पुरानी शोषण पर आधारित व्यवस्था रामराज्य को लाने के प्रयासों में संलग्न हैं. इन शक्तियों के पास आज के मनुष्य की नई समस्याओं का कोई सैद्धांतिक आधार नहीं हैं इसीलिये ये शक्तियां सड़े-गले अतीत की ओर देखती हैं. आज मनुष्य भी नया है और उसकी समस्याएं भी नयी है.

कहा जाता है कि भारतीय संविधान समानता, बंधुता और स्वतंत्रता जैसे सिद्धांतों पर आधारित है.

You might also like

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

अगर यह संविधान समानता पर आधारित है तो दलित शोषित वर्ग को एससी, एसटी और ओबीसी में क्यों बांटा गया ? यह दलित शोषितवर्ग तो पहले से ही हज़ारों वर्षों से चार वर्णों और हज़ारों जातियों में बांटा हुआ था और शोषण दमन का शिकार था, उसमें एक और विभाजन कर दिया गया. क्यों ?

भारत में आज भी 1% लोगों के पास मुल्क़ की 73% धन संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्ज़ा है, जिसके कारण आज भी दलितों का शोषण दमन जारी है क्योंकि यही आर्थिक असमानता हज़ारों वर्षों से आर्थिक सामाजिक शोषण का कारण रही है और आज भी जारी है.

इस आर्थिक असमानता के उन्मूलन के लिए इस संविधान में कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. इस घोर असमानता के चलते दलित समाज शोषण दमन से कैसे मुक्ति पा सकता है और कैसे समानता के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है ? एक तरफ़ यह संविधान निजी संपत्ति के अधिकार को कानूनी संरक्षण देता है दूसरी ओर, समानता की बात करता है जबकि यह निजी संपात्ति ही तमाम सामाजिक असमानताओं की जड़ है. क्या यह विरोधाभासपूर्ण बात नहीं है  ?




यह संविधान सभी को रोज़गार यानी रोज़ी रोटी का अधिकार नहीं देता. सभी को योग्यतानुसार रोज़गार दिए बग़ैर समानता कैसे संभव है ? यह संविधान में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि कोई भी मनुष्य किसी दूसरे मनुष्य के श्रम का शोषण नहीं करेगा और न ही यह प्रावधान है कि हर व्यक्ति अपने श्रम के द्वारा ही अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करेगा यानी बिना श्रम किए किसी को भी रोटी खाने का अधिकार नहीं होगा. लेकिन इस पूंजीवादी व्यवस्था मुनाफ़ा कमाने पर आधारित है जिसका अर्थ ही अंततः श्रम का शोषण होता है और यह तथ्य है कि दलितों का 85% हिस्सा गांवों में कथित उच्चवर्ग के मालिकों के खेतों में और शहरों में उनकी मिलों, दफ्तरों और दुकानों में श्रमिक के तौर पर कार्य करता है. ज़ाहिर है एक श्रमिक के रूप में सबसे ज्यादा शोषण उसी का होता है. इसी कारण रात-दिन ताबड़तोड़ मेहनत करने के बावजूद दलित शोषित श्रमिकवर्ग घोर गरीबी और सामाजिक असमानता और दमन का जीवन जीने को मजबूर है. इन्हीं के श्रम के शिक्षण से जो धन संपत्ति ये शोषक अर्जित करते हैं, उसी को निजी संपत्ति कहा जाता है.




यहः संविधान सभी को समान रूप से शिक्षा का अधिकार भी नहीं देता. क्यों बिना आर्थिक समानता के देश में सभी को सामान शिक्षा नहीं मिल सकती ? इसीलिये साधन संपन्न घरों के बच्चे विदेशों में उच्च शिक्षा पाते है और दलित शोषित वर्ग के लोग गरीबी के कारण सामान्य शिक्षा तक से वंचित रह जाते हैं . ऐसे में समानता कैसे संभव हो सकती है ?

इस संविधान में गरीबी को दूर करना किसी भी सरकार के लिए अनिवार्य नहीं है इसीलिये जब तक गरीबी मौजूद रहेगी तब तक समानता कैसे संभव है ? यह बात समझ से परे ही है.

संविधान में जाति और वर्ण को गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित नहीं किया गया है. संविधान में सिर्फ़ इतना आश्वासन दिया गया है कि राज्य जाति और वर्ण के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं करेगा. दूसरी ओर, खुद राज्य ही कई जगहों पर सरकारी फॉर्म भरते वक़्त आपकी जाति और धर्म पूछता है. बाबा साहब ने जातिवाद और वर्णव्यवस्था का स्रोत हिन्दू धर्म और उसके शास्त्रों को माना. फिर भी उन्होंने हिन्दूधर्म और हिन्दू शास्त्रों को गैर-कानूनी घोषित नहीं किया. अगर हिन्दुधर्म और हिन्दू शास्त्र ही वर्णव्यवस्था, जातिवाद और सामाजिक असमानता के लिए जिम्मेदार हैं तो इनको गैर-कानूनी घोषित किये बगैर जातिवाद को कैसे ख़त्म किया जा सकता है ? लेकिन इन दोनों को ग़ैर-कानूनी घोषित नहीं किया गया है. इसीलिए आज जातिवादी, वर्णव्यवस्था और हिंदुत्व की समर्थक शक्तियां सत्ता के सिंहासन पर बैठकर दलित शोषित श्रमिकवर्ग का मनमाने ढंग से दमन और शोषण कर रही हैं. और इतना ही नहीं ये शक्तियां संविधान में बदलाव करके देश में हिंदुत्व को लागू करके रामराज्य के नाम पर शोषण और दमन पर आधारित वर्णव्यवस्था को लागू करने पर आमादा है. क्या यह विरोधाभासपूर्ण नहीं है ?




बाबा साहब ने जातिवाद के खिलाफ संघर्ष किया लेकिन असफल रहे. इसके लिए वे बौद्ध धर्म की शरण में गए क्योंकि उनके अनुसार बौद्धधर्म हृदयपरिवर्तन के सिद्धांत पर आधारित है. वे सामाजिक क्रांति शोषकों के हृदयपरिवर्तन के द्वारा लाना चाहते थे लेकिन 65 वर्षों के बाद भी किसी शोषक का हृदयपरिवर्तन आज तक नहीं हुआ है. वे स्वयं भी गांधी, नेहरू, कांग्रेस, अपने तमाम विरोधियों और सामंती और पूंजीपति शोषकों का हृदयपरिवर्तन कर पाने में बुरी तरह असफल रहे. आज सवाल है कि आज की भिन्न सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों में इन तमाम शोषकों का हृदयपरिवर्तन क्या संभव है ?

आज जातिवादी और साम्प्रदायिक शक्तियां पांच हज़ार वर्ष पुरानी शोषण पर आधारित व्यवस्था रामराज्य को लाने के प्रयासों में संलग्न हैं. इन शक्तियों के पास आज के मनुष्य की नई समस्याओं का कोई सैद्धांतिक आधार नहीं हैं इसीलिये ये शक्तियां सड़े-गले अतीत की ओर देखती हैं. आज मनुष्य भी नया है और उसकी समस्याएं भी नयी है. लेकिन हम भी सोचें कि आज के मनुष्य की समस्याओं का इलाज़ ढाई हज़ार वर्ष पुराने बौद्धधर्म के माध्यम से कैसे हो सकता है ? कहीं हम भी आधुनिक और जानलेवा रोग कैंसर का इलाज़ प्राचीन जड़ी-बूटियों से तो नहीं कर रहे हैं ?




आंबेडकर जी ने संविधान क्या बना दिया की हम बिना सोचे-समझे उसका गुणगान करने में संलग्न हैं जबकि इसी संविधान के रहते गरीबी, भुखमरी, बेरीज़गारी, अशिक्षा, जातीय उत्पीड़न और दलित शोषित श्रमिकवर्ग का आर्थिक और सामाजिक रूप से दमन शोषण जारी है. इतना ही नहीं हज़ारों वर्ष पुरानी वही जातिवादी, वर्णव्यवस्था की पोषक, साम्प्रदायिक शक्तियां पुनः सत्ता पर काबिज़ होकर संविधान की धज्जियां उड़ा रही हैं. अपने अंतिम दिनों में बाबा साहब स्वयं मौजूदा व्यवस्था से निराश हो चुके थे. इसीलिये क्या आज हमें नए सिरे से सोचने की ज़रुरत नहीं है बजाए इसके कि हम संविधान का गुणगान करने में लगे रहें और शोषकवर्ग का शोषण दमन यूं ही चलता रहे ? यहां इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बाबा साहब ने इस संविधान में दिए आरक्षण तथा अन्य कुछ क़ानूनी प्रावधानों के माध्यम से दलित शोषितवर्ग को कुछ हद तक राहत देने का काम ज़रूर किया है.

यहां लिखने का मक़सद किसी का विरोध करना और आस्था को चोट पहुंचाना नहीं है बल्कि सोच-विचार की प्रक्रिया और स्वस्थ बहस को बढ़ावा देना ही है.

(लेखक नामालूम. सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त)




Read Also –

लाशों का व्यापारी, वोटों का तस्कर
भार‍तीय संविधान और लोकतंत्र : कितना जनतांत्रिक ?
संविधान में आस्था बनाम हिन्दू आस्था की चुनावी जंग
ब्राह्मणवाद का नया चोला हिन्दू धर्म ?
रामराज्य : गुलामी और दासता का पर्याय 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Previous Post

अब भी आप चाहते हो कि ऐसा तानाशाह ही दुबारा चुन कर आए !

Next Post

मसूद अज़हर : चीन के सवाल पर चुप्पी क्यों ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

मसूद अज़हर : चीन के सवाल पर चुप्पी क्यों ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मुसलमानों के बारे में दो गलतफहमियां

November 5, 2022

स्वास्थ्य सेवा: आप बनाम भाजपा-कांग्रेस की हत्यारी सरकार

August 31, 2017

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.